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₹2,000 से अधिक के चुनिंदा UPI भुगतान पर लगेगा MDR : जानिए ग्राहकों पर क्या होगा असर

Vishal Choyal

4 hours ago 44 views
जानिए ग्राहकों पर क्या होगा असर

नई दिल्ली/भारत। इन दिनों UPI ट्रांजैक्शन फीस चर्चा का विषय बनी हुई है। सोमवार को नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने एक नया नियम जारी किया है, जिसके अनुसार 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा UPI मर्चेंट लेनदेन पर 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगेगा।

₹75,000 या उससे अधिक राशि के भुगतान के लिए शुल्क की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति लेनदेन तय की गई है।

क्या है मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR)?

मर्चेंट डिस्काउंट रेट एक फीस है, जो किसी व्यापारी द्वारा डिजिटल या कार्ड से भुगतान स्वीकार करने पर भुगतान सेवा प्रदाता या बैंक द्वारा व्यापारी से ली जाती है।

सामान्यतः क्रेडिट कार्ड पर यह ट्रांजैक्शन वैल्यू का 1-3% तक और डेबिट कार्ड पर करीब 0.9% होता है।

15 अक्टूबर से ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा UPI मर्चेंट पेमेंट पर MDR लागू होगा। कुछ निर्धारित श्रेणियों में ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर ₹5 का फ्लैट MDR होगा, जबकि अन्य पात्र मर्चेंट लेनदेन में 0.4% MDR लगेगा, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 प्रति लेनदेन है।

यह शुल्क मर्चेंट यानी दुकान या कंपनी द्वारा दिया जाएगा, ग्राहक को सीधे कोई चार्ज नहीं देना होगा।

₹2,000 से अधिक UPI भुगतान पर कितना MDR लगेगा?

15 अक्टूबर 2026 से चुनिंदा P2M UPI लेनदेन में ₹2,000 से अधिक की राशि पर 0.4% MDR लागू होगा। उदाहरण के तौर पर—

- ₹2,500 के भुगतान पर MDR: ₹10

- ₹5,000 के भुगतान पर MDR: ₹20

- ₹50,000 के भुगतान पर MDR: ₹200

- ₹75,000 के भुगतान पर MDR: ₹300

- ₹75,000 से अधिक के भुगतान पर भी अधिकतम MDR: ₹300 प्रति लेनदेन

हालांकि, यह सामान्य 0.4% दर सभी प्रकार के UPI भुगतान पर लागू नहीं होगी। कुछ निर्धारित श्रेणियों के लिए अलग शुल्क संरचना है।

क्या आम जनता को UPI पेमेंट पर चार्ज देना होगा?

नहीं। नए MDR का भुगतान मर्चेंट पक्ष करेगा। आम लोगों के बीच यानी Person-to-Person (P2P) UPI ट्रांसफर पर कोई MDR नहीं लगाया जाएगा।

परिवार या दोस्तों को पैसे भेजने पर राशि चाहे जितनी हो, यह ट्रांजैक्शन फ्री रहेगा।

इसके अलावा ₹2,000 तक के P2M UPI भुगतान पर भी MDR नहीं लगेगा।

नया MDR नियम किन लेनदेन पर लागू होगा?

यह व्यवस्था मुख्य रूप से Person-to-Merchant (P2M) यानी ग्राहक द्वारा दुकानदार या व्यवसाय को किए जाने वाले पात्र UPI भुगतान से संबंधित है।

- ₹2,000 तक के P2M भुगतान: MDR नहीं

- ₹2,000 से अधिक के पात्र P2M भुगतान: 0.4% MDR

- ₹75,000 या उससे अधिक: अधिकतम ₹300 MDR

- Person-to-Person (P2P) भुगतान: MDR नहीं

पेट्रोल, रेलवे, बीमा और कुछ सेवाओं में क्या होगा?

कुछ निर्धारित श्रेणियों में ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर प्रतिशत के बजाय ₹5 का फ्लैट MDR निर्धारित किया गया है। इसमें रेलवे, ईंधन, बीमा और कुछ अन्य निर्दिष्ट सेवाएं शामिल हैं। इसलिए इन श्रेणियों को सामान्य 0.4% MDR से अलग समझना चाहिए।

छोटे दुकानदारों पर क्या असर होगा?

नए ढांचे में P2PM QR के जरिए प्रति माह ₹1 लाख तक प्राप्त करने वाले छोटे मर्चेंट को MDR से छूट दी गई है। यानी पात्र छोटे व्यापारी जिनकी मासिक UPI प्राप्तियां इस सीमा के भीतर हैं, उन पर इस MDR का भार नहीं पड़ेगा।

क्या MDR ग्राहक से वसूला जा सकता है?

नए ढांचे के अनुसार MDR मर्चेंट पक्ष से संबंधित शुल्क है। वित्त मंत्रालय ने बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी है कि नए शुल्क को UPI भुगतान करने वाले ग्राहकों पर सीधे न डाला जाए।

आसान भाषा में समझें

दोस्त को ₹10,000 भेजे → कोई MDR नहीं।

दुकान पर ₹1,500 का UPI भुगतान → MDR नहीं।

पात्र दुकान पर ₹5,000 का UPI भुगतान → 0.4% यानी ₹20 MDR मर्चेंट पक्ष पर।

₹75,000 का पात्र मर्चेंट भुगतान → अधिकतम ₹300 MDR।

नया शुल्क मुख्य रूप से पात्र मर्चेंट लेनदेन में मर्चेंट पक्ष पर लागू होगा और P2P भुगतान फ्री रहेगा।

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