पशुपालकों के लिए बड़ी योजना : 25 दुधारू पशुओं की यूनिट पर ₹42 लाख तक की लागत, कामधेनु योजना में मिलेगा अनुदान
Vishal Choyal
भोपाल। पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश शासन द्वारा मुख्यमंत्री पशुपालन विकास योजना के अंतर्गत डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना शुरू की गई है। योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को उन्नत नस्ल के पशुओं की यूनिट स्थापित करने के लिए सहायता दी जाएगी। इसमें 25 पशुओं की यूनिट स्थापित करने का प्रावधान है।
योजना का उद्देश्य
योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाना, पशुपालकों की आर्थिक स्थिति मजबूत करना और पशुपालन को व्यवसाय के रूप में विकसित करना है।
कौन ले सकता है लाभ
योजना का लाभ मध्यप्रदेश के निवासी सभी वर्गों के पशुपालक ले सकेंगे। योजना प्रदेश के सभी जिलों में लागू है। एक हितग्राही को अधिकतम 8 यूनिट यानी 200 दुधारू पशुओं तक की पात्रता होगी। प्रत्येक यूनिट के लिए 3.5 एकड़ कृषि भूमि आवश्यक है। परिवार के सामूहिक भूमि खाते को भी शामिल किया जा सकता है, लेकिन अन्य सदस्यों की सहमति जरूरी होगी।
योजना में वर्तमान में दुग्ध संघों को दूध उपलब्ध कराने वाले पशुपालकों को प्राथमिकता देने का प्रावधान है।
योजना का स्वरूप
हितग्राहियों का चयन पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर किया जाएगा। 25 पशुओं की यूनिट के लिए पशुओं की खरीद सहित अन्य खर्चों को परियोजना लागत में शामिल किया गया है। योजना में बैंक ऋण और अनुदान की व्यवस्था की गई है। यूनिट की राशि चार किस्तों में जारी की जाएगी।
लागत और अनुदान
योजना में 25 देशी नस्ल के दुधारू पशुओं की यूनिट की लागत ₹36 लाख, जबकि संकर गाय/भैंस की यूनिट की लागत ₹42 लाख निर्धारित है। लागत में पशु खरीद, बीमा, परिवहन और शेड निर्माण जैसी मदें शामिल हैं।
अनुदान के तहत अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के हितग्राहियों को योजना लागत का 33 प्रतिशत, जबकि अन्य श्रेणी के हितग्राहियों को 25 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान है।
ऋण अदायगी
बैंक ऋण की अधिकतम अवधि 7 वर्ष होगी। पहली किस्त जारी होने के 6 माह बाद मासिक किस्तें शुरू होंगी। योजना में 3 वर्ष की लॉक-इन अवधि रहेगी। इसके बाद पात्र हितग्राही के ऋण खाते में सब्सिडी का समायोजन किया जा सकेगा। हितग्राही निर्धारित अवधि से पहले भी ऋण चुका सकेगा।
जरूरी शर्तें
आवेदक किसी बैंक का डिफॉल्टर नहीं होना चाहिए। प्रत्येक यूनिट के लिए 3.5 एकड़ भूमि जरूरी है। हितग्राही को शासन द्वारा अधिकृत संस्थान से प्रशिक्षण लेना अनिवार्य होगा। पशुचिकित्सा एवं पशुपालन में स्नातक आवेदकों को प्रशिक्षण से छूट रहेगी।
आवेदन प्रक्रिया
योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन में बैंक, पशु और भूमि संबंधी जानकारी देनी होगी। FPO/दूध सहकारी समिति के सदस्य को संबंधित प्रमाण-पत्र देना होगा। भूमि का विवरण सत्यापित किया जाएगा और यूनिट की जानकारी पोर्टल पर दर्ज करनी होगी।
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