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झूलती 11 केवी लाइनों के खिलाफ किसानों का जल सत्याग्रह : कार्रवाई और एफआईआर की मांग हैडलाइन

Vishal Choyal

1 day ago 63 views
कार्रवाई और एफआईआर की मांग हैडलाइन

सीहोर।21 सितंबर 2026। विद्युत मंडल की झूलती 11 केवी विद्युत लाइनों और अधिकारियों की कथित लापरवाही के विरोध में किसानों का आंदोलन जारी है। पिछले करीब दो माह से किसान अलग-अलग माध्यमों से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी क्रम में किसानों ने नदी के पानी में खड़े होकर जल सत्याग्रह किया और विद्युत मंडल के अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कार्रवाई की मांग की।

किसान एवं समाजसेवी एम.एस. मेवाड़ा के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन में सीहोर जिले के करीब 25 गांवों के 500 से अधिक किसानों के शामिल होने का दावा किया गया है। किसानों के अनुसार, वे मुख्यमंत्री, राज्यपाल, मंत्रियों, कमिश्नर, कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक सहित विभिन्न अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर समस्या से अवगत करा चुके हैं। किसानों का कहना है कि शिकायतों और ज्ञापनों के बावजूद विद्युत मंडल के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की गई है, जिससे उनमें नाराजगी है।

किसानों का आरोप है कि गांवों से लेकर खेतों तक कई स्थानों पर 11 केवी विद्युत लाइनें काफी नीचे और झूलती हुई स्थिति में हैं, जिससे हादसों का खतरा बना रहता है। किसानों ने ग्राम महोडिया में सुगनबाई मेवाड़ा की करंट लगने से मौत, ग्राम बरबेली में किसान सतीश मेवाड़ा के गंभीर रूप से घायल होने तथा क्लासकला और जामुनी में मवेशियों की करंट लगने से मौत की घटनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने विद्युत व्यवस्था की जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

किसानों ने मांग की है कि सीहोर विद्युत मंडल के अधीक्षण यंत्री, कार्यपालन यंत्री तथा श्यामपुर सहायक यंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।

इसके साथ ही झूलती 11 केवी लाइनों को दुरुस्त करने और भविष्य में विद्युत हादसों की रोकथाम के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की गई है।

पीड़ित किसान के पिता ने दी दिल्ली जाने की चेतावनी

पीड़ित किसान सतीश मेवाड़ा के पिता प्रहलाद मेवाड़ा ने कहा कि यदि स्थानीय स्तर पर उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे अपने घायल बेटे को हाथ ठेले पर लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचेंगे और प्रधानमंत्री कार्यालय में न्याय की गुहार लगाएंगे।

किसानों ने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

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