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खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा : दक्षिणमुखी से उत्तरमुखी होने पर श्रद्धालुओं की चिंता

Vishal Choyal

1 hour ago 85 views
दक्षिणमुखी से उत्तरमुखी होने पर श्रद्धालुओं की चिंता

उज्जैन/मध्यप्रदेश। उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर का मुद्दा इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब छाया है। प्रशासन ने सड़क के लिए सती गेट के पास विराजित हनुमान जी की मूर्ति को हटाने की कोशिश 4 सितंबर से ही शुरू कर दी थी। करीब एक हफ्ते में प्रशासन ने मंदिर का ढांचा तो गिरा दिया, लेकिन जब मूर्ति को हटाने की बात आई तो बताया जा रहा है कि मूर्ति अपने स्थान से नहीं हिली। मूर्ति को हटाए जाने को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं।

लोगों का दावा है कि यह मंदिर करीब 170 साल पुराना है। भक्तजन इसे एक ओर चमत्कार मान रहे हैं, वहीं प्रतिमा के स्थानांतरण को लेकर प्रशासन की कार्रवाई चर्चा का विषय बनी हुई है।

प्रशासन का कहना है कि मूर्ति हटाने की कोशिश ही नहीं की गई, जबकि सोशल मीडिया पर यह चर्चा का विषय बनी हुई है। श्रद्धालु दूर-दूर से दर्शन के लिए आ रहे हैं। साथ ही साधु-संत बड़ी संख्या में मंदिर पहुंचे और वहां उन्होंने पूजा-अर्चना की।

वर्तमान में हनुमान जी की प्रतिमा दक्षिणमुखी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दक्षिणमुखी हनुमान का अपने आप में विशेष महत्व है।

दक्षिण दिशा को यम की दिशा बताया गया है, इसलिए दक्षिणमुखी हनुमान रक्षा के प्रतीक माने जाते हैं।

  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दक्षिणमुखी हनुमान की उपासना को नकारात्मक ऊर्जा और भय से मुक्ति से जोड़ा जाता है।

  • - हनुमान जी को शनि संबंधित कष्टों से मुक्ति पाने हेतु शुभ माना गया है। शनिवार को पूजा का विशेष विधान है।

- धार्मिक मान्यताओं में दक्षिणमुखी हनुमान को विशेष साधनाओं एवं मंत्र-जप से जोड़ा जाता है। हालांकि, प्रत्येक संप्रदाय की अपनी भिन्न-भिन्न विधियां हैं।

उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर में अस्थायी शेड के नीचे विराजमान हनुमान जी की प्रतिमा

नई जगह प्रतिमा लगाने से हनुमान जी दक्षिण दिशा (दक्षिणमुखी) से उत्तर दिशा (उत्तरमुखी) की ओर हो जाएंगे।

प्रशासन ने जो नई जगह आवंटित की है (वार्ड क्र. 20, जहां पूर्व में पानी की टंकी बनी थी, उसको हटाकर भूमि को खाली किया गया है), उस स्थान पर हनुमान जी का मुख उत्तरमुखी हो जाएगा।

श्रद्धालुओं का कहना है कि हनुमान जी की दिशा के इस बदलाव से मंदिर की आध्यात्मिक तथा धार्मिक मान्यताएं प्रभावित हो सकती हैं।

खड़े हनुमान जी की मूर्ति को सोशल मीडिया पर दैवीय संकेत मान रहे भक्तगण

जैसे ही यह खबर सोशल मीडिया पर वायरल हुई, अचानक दूर-दराज से भक्त पूजा एवं दर्शन हेतु आ रहे हैं। वहीं, भक्तों का मानना है कि इतनी भारी-भरकम मशीनों से मूर्ति को हटाने के बाद भी मूर्ति अपने स्थान से नहीं हिली। भक्त इसे दैवीय संकेत मान रहे हैं।

झुंड में साथ आए बंदर (लंगूर) — श्रद्धालुओं ने आस्था और धार्मिक संकेत के तौर पर देखा

यह चर्चा को और अधिक गति तब मिली, जब झुंड में एक साथ बंदर (लंगूर) खड़े हनुमान जी की मूर्ति के पास इकट्ठा हो गए। इसे देखते हुए भक्तों में और अधिक आस्था प्रबल हो गई।

मंदिर के पुजारी महेश बैरागी का कहना है कि प्रतिमा की आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल एवं विशेषज्ञों से जांच करवाकर, उनकी देखरेख में मूर्ति का स्थान परिवर्तित किया जाए।

पुजारी ने कहा कि उनका प्रशासन से किसी प्रकार का विरोध नहीं है, केवल प्रतिमा को सुरक्षित स्थान पर परिवर्तित करने की मांग कर रहे हैं।

फिलहाल प्रतिमा को अस्थायी शेड में सुरक्षित रखा गया है। अधिकारी मूर्ति को बिना नुकसान पहुंचाए हटाने के लिए विशेषज्ञों की राय का इंतजार कर रहे हैं। अब देखना यह है कि चर्चा का विषय बनी हनुमान जी की मूर्ति को स्थानांतरित करने के लिए प्रशासन क्या निर्णय लेता है।

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